Drama of krishan and sudama in s bkock 2019 (OM SHANTI)
The story of *नकारात्मकता का कचरा*
😴 😴 👉 *Night Story* 👈 😴 😴
✍ एक दिन देखता हूँ कि मोबाइल चलते-चलते कभी धीरे चलने लगता है, तो कभी हैंग होने लगता है।
एक जानकार ने बताया इसे हलका करना जरूरी है, फोन ओवरलोड हो गया है इसलिए चलने में दिक्कत करता है।
मैंने बेकार की तस्वीरें, फाइलें, डाटा डीलीट कर दिये।
चमत्कार सा हो गया। फोन चलने ही नहीं, दौड़ने लग गया। फोन क्या चलने लगा, दिमाग का इंजन दौड़ने लगा।
मन में आया यदि अनपेक्षित सामाग्री मिटाने से एक निर्जीव फोन तीव्र गति से चल सकता है, तो मन में भरी हुई, जमी हुई अनावश्यक यादगारें, अप्रिय घटनाएँ, वैर विरोध की भावनाएँ आदि-आदि सारी नकारात्मकताएँ मिटा दी जाएँ, भूला दी जाएं, तो आत्मा का पट सद्विचारों, सकारात्मकताओं के लिए खाली हो जाए।
👉 *जीवन बहुत छोटा है, खुल कर आनन्द से जीया जाए*
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The story of मिट्टी का खिलौना (OM SHANTI)
😴😴 * *एक कहानी मिट्टी का खिलौना** 🌝🌝
*👉🏿मिट्टी का खिलौना*
एक गांव में एक कुम्हार रहता था, वो मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाया करता था, और उसे शहर जाकर बेचा करता था। जैसे तैसे उसका गुजारा चल रहा था, एक दिन उसकी बीवी बोली कि अब यह मिट्टी के खिलोने और बर्तन बनाना बंद करो और शहर जाकर कोई नौकरी ही कर लो, क्यूँकी इसे बनाने से हमारा गुजारा नही होता, काम करोगे तो महीने के अंत में कुछ धन तो आएगा। कुम्हार को भी अब ऐसा ही लगने लगा था, पर उसको मिट्टी के खिलोने बनाने का बहुत शौक था, लेकिन हालात से मजबूर था, और वो शहर जाकर नौकरी करने लगा, नौकरी करता जरूर था पर उसका मन अब भी, अपने चाक और मिट्टी के खिलोनों मे ही रहता था।
समय बीतता गया, एक दिन शहर मे जहाँ वो काम करता था,उस मालिक के घर पर उसके बच्चे का जन्मदिन था। सब महंगे महंगे तोहफे लेकर आये, कुम्हार ने सोचा क्यूँ न मै मिट्टी का खिलौना बनाऊ और बच्चे के लिए ले जाऊ, वैसे भी हम गरीबों का तोहफा कौन देखता है। यह सोचकर वो मिट्टी का खिलौना ले गया. जब दावत खत्म हुई तो उस मालिक के बेटे को और जो भी बच्चे वहा आए थे सबको वो खिलोना पंसद आया और सब जिद करने लगे कि उनको वैसा ही खिलौना चाहिए। सब एक दूसरे से पूछने लगे की यह शानदार तोहफा लाया कौन, तब किसी ने कहा की यह तौहफा आपका नौकर लेकर आया.
सब हैरान पर बच्चों के जिद के लिए, मालिक ने उस कुम्हार को बुलाया और पूछा कि तुम ये खिलौना कहाँ से लेकर आये हो, इतना मंहगा तोहफा तूम कैसे लाए? कुम्हार यह बाते सुनकर हंसने लगा और बोला माफ कीजिए मालिक, यह कोई मंहगा तोहफा नही है, यह मैने खुद बनाया है, गांव मे यही बनाकर मै गुजारा करता था, लेकिन उससे घर नही चलता था इसलिए आपके यहाँ नौकरी करने आया हूं। मालिक सुनकर हैरान हो गया और बोला की तुम क्या अभी यह खिलोने और बना सकते हो, बाकी बच्चों के लिए? कुम्हार खुश होकर बोला हाँ मालिक, और उसने सभी के लिए शानदार रंग बिरंगे खिलौने बनाकर दिए।
यह देख मालिक ने सोचा क्यूँ ना मै, इन खिलौने का ही व्यापार करू और शहर मे बेचू। यह सोचकर उसने कुम्हार को खिलौने बनाने के काम पर ही लगा दिया और बदले मे हर महीने अचछी तनख्वाह और रहने का घर भी दिया। यह सब पाकर कुम्हार और उसका परिवार भी बहुत खुश हो गया और कुम्हार को उसके पंसद का काम भी मिल गया.
इस कहानी का मूल अर्थ यह है की हुनर हो तो इंसान कभी भी किसी भी परिस्थिति मे उस हुनर से अपना जीवन सुख से जी सकता है और जग मे नाम करता है।
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