# Brahmakumaries || रात्रि कहांनी ❣️❣️❣️❣️ *👉🏿स्वर्ग यहां और नरक भी यहां*23/04/2020 || (OM SHANTI)


एक बुजुर्ग औरत मर गई, यमराज लेने आये।

औरत ने यमराज से पूछा, आप मुझे स्वर्ग ले जायेगें या नरक।

यमराज बोले दोनों में से कहीं नहीं।

तुमनें इस जन्म में बहुत ही अच्छे कर्म किये हैं, इसलिये मैं तुम्हें सिधे प्रभु के धाम ले जा रहा हूं।

बुजुर्ग औरत खुश हो गई, बोली धन्यवाद, पर मेरी आपसे एक विनती है।

मैनें यहां धरती पर सबसे बहुत स्वर्ग - नरक के बारे में सुना है मैं एक बार इन दोनों जगाहो को देखना चाहती हूं।

यमराज बोले तुम्हारे कर्म अच्छे हैं, इसलिये मैं तुम्हारी ये इच्छा पूरी करता हूं।

चलो हम स्वर्ग और नरक के रसते से होते हुए प्रभु के धाम चलेगें।

दोनों चल पडें, सबसे पहले नरक आया।

नरक में बुजुर्ग औरत ने जो़र जो़र से लोगो के रोने कि आवाज़ सुनी।

वहां नरक में सभी लोग दुबले पतले और बीमार दिखाई दे रहे थे।

औरत ने एक आदमी से पूछा यहां आप सब लोगों कि ऐसी हालत क्यों है।

आदमी बोला तो और कैसी हालत होगी, मरने के बाद जबसे यहां आये हैं, हमने एक दिन भी खाना नहीं खाया।

भूख से हमारी आतमायें तड़प रही हैं

बुजुर्ग औरत कि नज़र एक वीशाल पतिले पर पडी़, जो कि लोगों के कद से करीब 300 फूट ऊंचा होगा, उस पतिले के ऊपर एक वीशाल चम्मच लटका हुआ था।

उस पतिले में से बहुत ही शानदार खुशबु आ रही थी।

बुजुर्ग औरत ने उस आदमी से पूछा इस पतिले में क्या है।

आदमी मायूस होकर बोला ये पतिला बहुत ही स्वादीशट खीर से हर समय भरा रहता है।

बुजुर्ग औरत ने हैरानी से पूछा, इसमें खीर है

तो आप लोग पेट भरके ये खीर खाते क्यों नहीं, भूख से क्यों तड़प रहें हैं।

आदमी रो रो कर बोलने लगा, कैसे खायें

ये पतिला 300 फीट ऊंचा है हममें से कोई भी उस पतिले तक नहीं पहुँच पाता।

बुजुर्ग औरत को उन पर तरस आ गया
सोचने लगी बेचारे, खीर का पतिला होते हुए भी भूख से बेहाल हैं।

शायद ईश्वर नें इन्हें ये ही दंड दिया होगा

यमराज बुजुर्ग औरत से बोले चलो हमें देर हो रही है।

दोनों चल पडे़, कुछ दूर चलने पर स्वरग आया।

वहां पर बुजुर्ग औरत को सबकी हंसने,खिलखिलाने कि आवाज़ सुनाई दी।

सब लोग बहुत खुश दिखाई दे रहे थे।
उनको खुश देखकर बुजुर्ग औरत भी बहुत खुश हो गई।

पर वहां स्वरग में भी बुजुर्ग औरत कि नज़र वैसे ही 300 फूट उचें पतिले पर पडी़ जैसा नरक में था, उसके ऊपर भी वैसा ही चम्मच लटका हुआ था।

बुजुर्ग औरत ने वहां लोगो से पूछा इस पतिले में कया है।

स्वर्ग के लोग बोले के इसमें बहुत टेस्टी खीर है।

बुजुर्ग औरत हैरान हो गई

उनसे बोली पर ये पतिला तो 300 फीट ऊंचा है

आप लोग तो इस तक पहुँच ही नहीं पाते होगें

उस हिसाब से तो आप लोगों को खाना मिलता ही नहीं होगा, आप लोग भूख से बेहाल होगें

पर मुझे तो आप सभी इतने खुश लग रहे हो, ऐसे कैसे

लोग बोले हम तो सभी लोग इस पतिले में से पेट भर के खीर खाते हैं

औरत बोली पर कैसे,पतिला तो बहुत ऊंचा है।

लोग बोले तो क्या हो गया पतिला ऊंचा है तो

यहां पर कितने सारे पेड़ हैं, ईश्वर ने ये पेड़ पौधे, नदी, झरने हम मनुष्यों के उपयोग के लिये तो बनाईं हैं

हमनें इन पेडो़ कि लकडी़ ली, उसको काटा, फिर लकड़ीयों के तुकडो़ को जोड़ के वीशाल सिढी़ का निर्माण किया

उस लकडी़ की सिढी़ के सहारे हम पतिले तक पहुंचते हैं

और सब मिलकर खीर का आंनद लेते हैं

बुजुर्ग औरत यमराज कि तरफ देखने लगी 

यमराज मुसकाये बोले

*ईशवर ने स्वर्ग और नरक मनुष्यों के हाथों में ही सौंप रखा है,चाहें तो अपने लिये नरक बना लें, चाहे तो अपने लिये स्वरग, ईशवर ने सबको एक समान हालातो में डाला हैं*

*उसके लिए उसके सभी बच्चें एक समान हैं, वो किसी से भेदभाव नहीं करता*

*वहां नरक में भी पेेड़ पौधे सब थे, पर वो लोग खुद ही आलसी हैं, उन्हें खीर हाथ में चाहीये,वो कोई कर्म नहीं करना चाहते, कोई मेहनत नहीं करना चाहते, इसलिये भूख से बेहाल हैं*

*क्योंकि ये ही तो ईश्वर कि बनाई इस दुनिया का नियम है, जो कर्म करेगा, मेहनत करेगा, उसी को मीठा फल खाने को मिलेगा*

दोस्तों ये ही आज का सुविचार है, स्वर्ग और नरक आपके हाथ में है
मेहनत करें, अच्छे कर्म करें और अपने जीवन को स्वर्ग बनाएं।


🌺🔹🌺🔹SHIV BABA🌺🔹🌺

# Brahmakumaries || Night story ❣️❣️❣️❣️ *👉🏿10 मिनट का धैर्य*|| 22/04/2020 (OM SHANTI)


*टीचर ने क्लास के सभी बच्चों को एक एक खूबसूरत टॉफ़ी दी और फिर कहा।*

*"बच्चो ! आप सब को दस मिनट तक अपनी टॉफ़ी नहीं खानी है और ये कहकर वो क्लास रूम से बाहर चले गए।"*


कुछ पल के लिए क्लास में सन्नाटा छाया था, हर बच्चा उसके सामने पड़ी टॉफ़ी को देख रहा था और हर गुज़रते पल के साथ खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। दस मिनट पूरे हुए और टीचर क्लास रूम में आ गए। समीक्षा की। पूरे वर्ग में सात बच्चे थे, जिनकी टाफियाँ जस की तस थी,जबकि बाकी के सभी बच्चे टॉफ़ी खाकर उसके रंग और स्वाद पर टिप्पणी कर रहे थे। टीचर ने चुपके से इन सात बच्चों के नाम को अपनी डायरी में दर्ज कर लिए और नोट करने के बाद पढ़ाना शुरू किया।

इस शिक्षक का नाम प्रोफेसर वाल्टर मशाल था।

कुछ वर्षों के बाद प्रोफेसर वाल्टर ने अपनी वही डायरी खोली और सात बच्चों के नाम निकाल कर उनके बारे में खोज बीन शुरू किया। काफ़ी मेहनत के बाद , उन्हें पता चला कि सातों बच्चों ने अपने जीवन में कई सफलताओं को हासिल किया है और अपनी अपनी फील्ड में सबसे सफल है। प्रोफेसर वाल्टर ने अपने बाकी वर्ग के छात्रों की भी समीक्षा की और यह पता चला कि उनमें से ज्यादातर एक आम जीवन जी रहे थे, जबकी कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें सख्त आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड रहा था।

इस सभी प्रयास और शोध का परिणाम प्रोफेसर वाल्टर ने एक वाक्य में निकाला और वह यह था।

"जो आदमी दस मिनट तक धैर्य नहीं रख सकता, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता”

इस शोध को दुनिया भर में शोहरत मिली और इसका नाम "मार्श मेलो थ्योरी" रखा गया था क्योंकि प्रोफेसर वाल्टर ने बच्चों को जो टॉफ़ी दी थी उसका नाम "मार्श मेलो" था। यह फोम की तरह नरम थी।

इस थ्योरी के अनुसार दुनिया के सबसे सफल लोगों में कई गुणों के साथ एक गुण 'धैर्य' पाया जाता है, क्योंकि यह ख़ूबी इंसान के बर्दाश्त की ताक़त को बढ़ाती है,जिसकी बदौलत आदमी कठिन परिस्थितियों में निराश नहीं होता और वह एक असाधारण व्यक्तित्व बन जाता है।

अतः धैर्य  कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति की सहनशीलता की अवस्था है जो उसके व्यवहार को क्रोध या खीझ जैसी नकारात्मक अभिवृत्तियों से बचाती है। दीर्घकालीन समस्याओं से घिरे होने के कारण व्यक्ति जो दबाव या तनाव अनुभव करने लगता है उसको सहन कर सकने की क्षमता भी धैर्य का एक उदाहरण है। वस्तुतः धैर्य नकारात्मकता से पूर्व सहनशीलता का एक स्तर है। यह व्यक्ति की चारित्रिक दृढ़ता का परिचायक भी है।
हमारे मनीषियों  ने इसीलिये कहा :

न धैर्येण बिना लक्ष्मी-
र्न शौर्येण बिना जयः।
न ज्ञानेन बिना मोक्षो 
न दानेन बिना यशः॥

धैर्य के बिना धन, वीरता के बिना विजय, ज्ञान के बिना मोक्ष और दान के बिना यश प्राप्त नहीं होता है॥

भर्तहरी जी ने नीति शतक में कहा है :

निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु
लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।
अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा
न्याय्यात्पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।।

नीति में निपुण व्यक्ति निन्दा करे अथवा प्रशंसा करे, धन-सम्पत्ति समीप आये अथवा इच्छानुसार चली जावे, मृत्यु आज ही हो अथवा एक युग के बाद हो किन्तु धैर्यशाली पुरुष न्याययुक्त मार्ग से एक पग भी विचलित नहीं होते हैं।

धैर्य रखे घरों में रहे 
स्वस्थ रहे मस्त रहे
अपनी ओर अपने परिवार की सुरक्षा अपने हाथो में है ।
प्रधानमंत्री जी के आदेशों का पालन करें ।
प्रणाम
साभार


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#BrahmaKumaries EK Tumhi se baba bolu video songs (OM SHANTI)

# Brahmakumaries || रात्रि कहांनी ❣️❣️❣️❣️ *👉🏿जडीबुटी☘||21/04/2020 (OM SHANTI)

बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी. एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी , ” बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था , लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता।"*

*” युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है.” , सन्यासी बोला।*

*"लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.” , महिला ने विनती की।*

*सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,” देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता, लेकिन उसे बनाने के लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है ."*

*”आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी .”, महिला बोली।*

*”मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए .”, सन्यासी बोला।*

*अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी, बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा, बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी।*

*अगले कुछ दिनों तक यही हुआ , महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया।*

*फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची, और बोली ” मैं बाल ले आई बाबा ।*

*“बहुत अच्छे .” और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया ।*
*”अरे ये क्या बाबा, आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया …… अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?” महिला घबराते हुए बोली।*

*”अब तुम्हे  किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .” सन्यासी बोला ।” जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ? जाओ जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो.।"*

*महिला सन्यासी की बात समझ गयी, अब उसे उसकी जड़ी-बूटी मिल चुकी थी।*


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✨✨✨ *रात्रि कहानी* 19/04/2019✨✨✨आह् ..एक अत्यंत सुंदर प्रस्तुति......😴🌝👇👇👇*(((((बांह छुड़ाये जात हो))))*

एक बार सूरदास जी कही जा रहे थे....
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चलते चलते मार्ग में एक गढ्ढा आया और सूरदास जी उसमे गिर गए और 
जेसे ही गढ्ढे में गिरे तो किसको पुकारते ? 
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अपने कान्हा को पुकारने लगे भक्त जो ठहरे ! एक भक्त अपने जीवन में मुसीबत के समय में प्रभु को ही पुकारता है !
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और पुकारने लगे की अरे मेरे प्यारे छोटे से कन्हैया.... आज तूने मुझे यंहा भेज दिया और अब क्या तू यंहा नहीं आएगा... मुझे अकेला ही छोड़ देगा,
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और जिस समय सूर जी ने प्रभु को याद किया तो आज प्रभु भी उसकी पुकार  सुने बिना नहीं रह पाए !
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सच है जब एक भक्त दिल से पुकारा करता है तो यह  टीस प्रभु के दिल में भी उठा  करती है और आज कान्हा भी उसी समय एक बाल गोपाल के रूप में वंहा प्रकट हो गए ! 
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और प्रभु के पांव की नन्ही नन्ही सी पेंजनिया जब छन छन करती हुई सूर जी के  पास आई तो सूर जी को समझते देर न लगी !
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कान्हा उसके समीप आये और बोले अरे बाबा नीचे क्या कर रहे हो, लो मेरा हाथ पकड़ो और जल्दी से ऊपर चले आओ !
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जेसे ही सूरदास जी ने इतनी प्यारी सी मिश्री सी घुली हुई वाणी सुनी तो जान गए कि मेरा कान्हा आ गया, और बहुत प्रसन्न हो रहे हैं !
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और कहने लगे की अच्छा बाल गोपाल के रूप में आ गए ! कन्हाई तुम आ ही गए न !
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बाल गोपाल कहने लगे अरे कोन कान्हा, किसका नाम लेते जा रहे हो, जल्दी से हाथ पकड़ो और उपर आ जाओ, ज्यादा बाते न बनाओ !
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सूरदास जी मुस्कुरा पड़े और कहने लगे सच में कान्हा तेरी बांसुरी के भीतर भी वो मधुरता नहीं,
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मानता हूँ कि तेरी बांसुरी सारे संसार को नचा दिया करती है लेकिन कान्हा तेरे भक्तो की टेढ़ तुझे नचा दिया करती है !
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क्यों कान्हा सच है न तभी तो तू दौड़ा चला आया !
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बाल गोपाल कहने लगे अरे बहुत हुआ, पता नही क्या कान्हा कान्हा किये जा रहा है !
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मै तो एक साधारण सा बाल ग्वाल हूँ मदद लेनी है तो लो नहीं तो मैं तो चला, फिर पड़े रहना इसी गढ्ढे में !
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जैसेे ही इतना कहा सूरदास जी ने झट से कान्हा का हाथ  पकड़ लिया, और कहा कान्हा तेरा ये दिव्य स्पर्श, तेरा ये सानिंध्य ये सूर अच्छी तरह जानता है !
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मेरा दिल कह रहा है की तुम मेरा श्याम ही है !
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जेसे ही आज चोरी पकड़े जाने के डर से कान्हा आज भागने लगे तो सूर जी ने कह दिया-
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बांह छुडाये जात हो, 
                निबल जान जो मोहे
ह्रदय से जो जाओगे, 
                सबल समझूंगा मैं तोहे
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यंहा से तो भाग जाओगे लेकिन मेरे दिल की कैद से कभी नहीं निकल पाओगे ! तो ऐसे थे सूरदास जी प्रभु के भक्त !
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धन्य है ऐसे भक्त जो प्रभु को नचा दिया करते है .
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💫OM SHANTI💥

# विशाल बुद्धि की निशानी क्या है

विशाल बुद्धि की निशानी क्या है :-


1. सबसे पहले अपने आपको और बाप को जानने की विशेषता |
2. अपने परिवार की कोई भी आत्मा वरदान से वंचित न रह जाए। ऐसा उमंग उत्साह दिल में रहता है |
3 हर आत्मा को बाप की, परिवार की समीपता का विशेष अनुभव कराओ। 

4. बेहद की विशाल बुद्धि, विशाल उमंग उत्साह में रहता है |
5. बेहद की स्टेज पर स्थित हो, बेहद की आत्माओं की सेवा का श्रेष्ठ संकल्प ही सफलता का सहज साधन है।
6. हर समय अपनी मिली हुई ड्यूटी में सेवा में नवीनता लाना।


Example :-चाहे भोजन खिलाने की, चाहे भाषण करने की ड्यूटी हो लेकिन हर सेवा में हर समय नवीनता भरना - इसको कहा जाता है विशालता |

# Brahmakumaries पास विद् ऑनर होने वाले स्टूडेन्ट की निशानी क्या होगी? (OM SHANTI)

Q :- पास विद् ऑनर होने वाले स्टूडेन्ट की निशानी क्या होगी?

Ans :-

  1. :-  वह सिर्फ एक सब्जेक्ट में नहीं लेकिन सभी सब्जेक्ट पर पूरा-पूरा ध्यान देंगे।

  2.  स्थूल सर्विस की भी सब्जेक्ट अच्छी है, बहुतों को सुख मिलता है, इससे भी मार्क्स जमा होती हैं लेकिन साथ-साथ ज्ञान भी चाहिए तो चलन भी चाहिए।
  3.  दैवीगुणों पर पूरा अटेन्शन हो। 
  4. ज्ञान योग पूरा हो तब पास विद् ऑनर हो सकेंगे।
  5. अपनी ऊंच तकदीर बनाने के लिए आपस में बहुत-बहुत क्षीरखण्ड, मीठा होकर रहना है, कभी लून-पानी नहीं होना है।
  6.  सभी सब्जेक्ट पर पूरा अटेन्शन देना है।